Beti Bachao Beti Padhao – District Administration


SKOCH Award Nominee

Category: District administration
Sub-Category: Social Responsibility
Project: Beti Bachao Beti Padhao
Start Date: 2018-10-17
Organisation: District Administration
Respondent: Mr Arindam Chaudhry, Deputy Commissioner
hpmandi.nic.in


Video


Presentation


For more information, please contact:
Mr Arindam Chaudhry, Deputy Commissioner at dc-man-hp@nic.in


(The content on the page is provided by the Exhibitor)

208 Comments

  1. BBBP is a great initiative of govt for ensuring birth of girls children, their education and we’ll being. District Administration Mandi has taken a number of good initiative under this scheme, yet much more has to be done. Prenatal Sex determination is an area of concern, a periodic inspections of health care institutions with USG facilities is needed so that such evil could be eradicated.
    Regards

  2. बेटी बचाओ..बेटी पढाओ

    बेटी भार नहीं, है आधार..
    जीवन है उसका अधिकार..
    शिक्षा है उसका हथियार..
    बढाओ कदम, करो स्वीकार।

  3. नए बदलते भारत में बदल लो अपनी सोच, बेटियां बनती हैं सहारा नहीं होती हैं बोझ। beti bachao beti padhao

  4. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना बेटियों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो रही है।

  5. Well District Mandi has done absolutely wonderful in terms of education of girls. Our society definitely sees girls and boys equally and not only govt has helped in this equality through education but girls are loved as boys as our girls have been acheiveres and would continue to be🙏

  6. Beti he anmol rattan, jinke bina manav jati ek na ek din bilupt ho jaegi isliye beti ko beto ki tarah palo, padhao or Kabil bnao.

    “Betian to hain Ishwar ka uphaar
    Mt chhino inke Jine ka adhikar”

  7. In distric Mandi Beti Bachao Abhiyan has been implemented diligently and meticulously. The sumptuous impact of the aforementioned project can be felt in terms of high enrolment ratio of girl children in schools and comparatively better nutritional status.

  8. बेटी बचाओ..बेटी पढाओ

    बेटी भार नहीं, है आधार..
    जीवन है उसका अधिकार..
    शिक्षा है उसका हथियार..
    बढाओ कदम, करो स्वीकार।

  9. “एक बेटा भाग्य से होता है लेकिन एक बेटी सौभग्य से होती है” बेटी को सिर्फ स्लोगन में नहीं बचाना है बल्कि वास्तव में बेटी को पढ़ाने और बचाने कि आवश्यकता है दिन प्रतदिन बेटी पर अत्याचार हो रहे हैं !

  10. ‘एक बेटी किसी पर बोझ नहीं हो सकती। बल्कि वह तो दो घरों आधार होती है’ मैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का समर्थन करती हूं !

  11. Hi Sir / Ma’am

    Good Morning! Hope you are doing well!

    This was a great initiative taken by the government. As per the performance of our Mandi district administration has done a great job. They approached every family of the district about the initiative and spread the information to all. Now entire district girl is getting an education without cost to parents.

  12. Keep on doing the good workबेटियों के प्रति समाज की बेरुखी को देखते हुए भी सरकार ने अनेकों कड़े नियम अपनाए हैं , तथा लोगों में जागरूकता के लिए कई सारे अभियान का शुभारंभ किया है। जहां कन्याओं की भ्रूण हत्या को दंड के रूप में स्वीकारा गया है , वहीं कन्याओं के जन्म के साथ कई सारे सुविधाओं ने कन्याओं के प्रति सम्मान और जागरूकता का भाव भी आया है। सुकन्या समृद्धि योजना जैसी योजनाओं ने बेटियों के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदला है।

    बेटी की हत्या अथवा उसको ना अपनाना यह केवल एक व्यक्ति के सामर्थ्य के बाहर है , इसलिए पूरे परिवार को मिलकर बेटी को अपनाना चाहिए और उसे समाज में वह मान सम्मान देना चाहिए जो बेटे को मिलता है। बेटी और बेटों में भेदभाव करने वाले स्वयं से अथवा अपने भगवान से भेदभाव करते हैं। उनका कभी विकास नहीं होता , वह सदैव अभावग्रस्त रहते हैं। बेटियां भगवान का वरदान है ऐसा सबको स्वीकार करते हुए बेटी को अपनाना चाहिए।
    ” मां नहीं तो बेटी नहीं , बेटी नहीं तो बेटा नहीं। “

    ” बेटी बचाओ समाज बचाओ। “

    ” जिस देश में बेटी का मान नहीं , वह देश महान नहीं। “

    ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , समाज को उन्नति का मार्ग दिखाओ। “

    ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , देश में साक्षरता बढ़ाओ। “

  13. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भूमिका:

    दोस्तों आज हम बात करेगे “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान” की हमें जरुरत क्यों पड़ी, ऐसा क्या हुआ होगा कि भारत जैसे पुरातन संस्कृति और धर्मपरायण विचारों वाले राज्य को बेटियों को बचाने के लिए और उनको पढ़ाने के लिए एक अलग मुहिम चलानी पड़ी सबसे प्रमुख कारण तो यह है कि लोगों की मानसिकता बहुत संकुचित हो गई है, उनका बेटियों के प्रति रवैया बहुत ही घटिया स्तर का हो गया है और सोचने की बात तो यह है कि उन्हें ऐसा कृत्य करते हुए जरा भी शर्म महसुस नहीं होती है।

    ऐसी छोटी व संकुचित सोच रखने वाले लोग बेटी और बेटो में भेदभाव करते हैं क्योंकि वह सोचते हैं कि बेटे हमारी पूरी जिंदगी भर सेवा करेंगे और बेटियां तो पराया धन होती हैं उनको पढ़ा लिखा कर क्या फायदा होगा, इसलिए वह बेटों को ज्यादा अच्छी शिक्षा दिलाते हैं और उन्हीं का ज्यादा ध्यान रखते हैं।

    वर्तमान में उन लोगों की सोच इतनी निच्चे स्तर तक गिर गई है कि वे लोग बेटियों को अब जन्म लेने से पहले ही कोख में ही मार देते हैं और अगर गलती से उनका जन्म भी हो जाता है तो उनको इसी सुनसान स्थान पर फेंक आते हैं।

    हमारी सरकार ने इसके विरुद भी कन्या भूण हत्या को रोकने के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं लेकिन उनका पालन अच्छी तरह से नहीं होने के कारण मनावान्छित लाभ नही मिल रहा है।

    बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा इसलिए दिया गया क्योंकि भारत में दिन-प्रतिदिन बेटियों की स्थिति खराब होती जा रही हैं, उनके साथ उन्हीं के जन्मदाता भेदभाव कर रहे हैं। वह सोचते हैं कि बेटियां तो पराई-धन होती हैं उनकी कैसे भी जल्दी से जल्दी शादी करा दो और उनको पढ़ाने-लिखाने का कोई फायदा नहीं होगा।

    इसलिए वे केवल बेटों पर ज्यादा ध्यान देते हैं उनकी अच्छी शिक्षा कि उचित व्यवस्था करते हैं और बेटियों को स्कूल में पढ़ने तक का अवसर नहीं देते हैं।

  14. हमारे देश में आजादी के 70 साल बाद भी बालिका के प्रति सदियों पुरानी सोच और परम्परा अभी भी मौजूद है। जिस से देश की तरक्की पर बुरा प्रभाव पड़ा है। गिरता लिंगानुपात ,लड़कियों का कम या बिल्कुल भी पढ़ा लिखाना होना ,जीवन में असामनता का अधिकार एकजटिल समस्या बनी हुई है। भारत सरकार ने इसकी और धयान देते हुए बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की शुरुवात की है। जिसका उद्देश्य बेटियों के प्रति सकारत्मक सोच को बढ़ावा देना और उनके अधिकार की रक्षा करना है

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